
नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस की तैयारियां जोरों पर हैं। इस खास मौके पर यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेता मुख्य अतिथि बनकर भारत आ रहे हैं। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से 28 जनवरी तक यहां रहेंगे।
इस दौरे से भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देने की उम्मीदें प्रबल हैं। डावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान लेयेन ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ से उपजी अस्थिरता के बीच यूरोप बाजार विविधीकरण की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘डावोस के ठीक बाद मैं भारत जाऊंगी। हम ऐतिहासिक व्यापार समझौते के अंतिम चरण में हैं। यह 20 अरब लोगों का बाजार बनेगा, जो वैश्विक जीडीपी का एक चौथाई होगा।’
लेयेन ने जोर देकर कहा कि यह यूरोप को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते महाद्वीप में पहले प्रवेश का लाभ देगा। भारत और ईयू लंबे इंतजार के बाद एफटीए को पूरा करने के करीब हैं। 27 जनवरी को होने वाली शिखर बैठक में इसका औपचारिक ऐलान हो सकता है।
सूत्र बताते हैं कि दोनों पक्ष बातचीत समाप्ति की घोषणा के लिए एक दस्तावेज अपनाएंगे। इसके बाद यूरोपीय संसद और परिषद से मंजूरी मिलेगी। साथ ही सुरक्षा-रक्षा साझेदारी और भारतीय पेशेवरों की ईयू में गतिशीलता बढ़ाने वाला समझौता भी होगा।
यह 27 देशों वाले ईयू के साथ भारत का अब तक का सबसे बड़ा सौदा होगा। वित्तीय वर्ष 2024 में 135 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इसे ‘सभी समझौतों की मां’ कहा है।
भारत कपड़ा, चमड़ा, परिधान, रत्न-आभूषण और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों के लिए शून्य शुल्क पहुंच चाहता है। ईयू के सीबीएएम जैसे मुद्दों पर चर्चा जारी है, लेकिन गोयल ने पुष्टि की कि वार्ता अंतिम पड़ाव पर है। यह समझौता दोनों पक्षों के लिए नई आर्थिक संभावनाएं खोलेगा।