
पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को एक और झटका लगा है। दिसंबर 2025 में निर्यात 20.4 प्रतिशत गिर गया, जो लगातार पांचवें महीने की गिरावट है। सरकारी आंकड़े इस संकट की गहराई को उजागर करते हैं, जहां व्यापार घाटा चरम पर पहुंच गया है।
भारत और अफगानिस्तान के साथ सीमा तनाव ने व्यापार मार्गों को ठप कर दिया है। चीन पर अत्यधिक निर्भरता महंगी साबित हो रही, जहां ढुलाई और अन्य खर्च बढ़ रहे हैं।
दिसंबर में निर्यात 2.91 अरब डॉलर से घटकर 2.32 अरब डॉलर रह गया, जबकि आयात 2 प्रतिशत बढ़कर 6.02 अरब डॉलर हो गया। इससे मासिक व्यापार घाटा 24 प्रतिशत उछलकर 3.7 अरब डॉलर पर पहुंचा।
यह गिरावट उत्पाद विविधीकरण की कमी, प्रतिस्पर्धात्मकता में कमी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से दूरी को दर्शाती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले छह माह में निर्यात 8.7 प्रतिशत घटकर 15.18 अरब डॉलर, आयात 11.3 प्रतिशत बढ़कर 34.39 अरब डॉलर हो गया। घाटा 35 प्रतिशत अधिक 19.2 अरब डॉलर पहुंचा।
दशकों से निर्यात सीमित रेंज में अटका है, जो क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों से पिछड़ गया। सरकारें विदेशी सहायता, रेमिटेंस और ऋणों पर टिकीं, लेकिन मूल कमजोरियों को अनदेखा किया। अब यह दबाव वास्तविक आर्थिक संकट में बदल रहा है।
निर्यात सुधार के बिना पाकिस्तान को विदेशी मुद्रा संकट और मुद्रास्फीति का सामना करना पड़ेगा। तत्काल विविधीकरण और नीतिगत बदलाव जरूरी हैं।