
नई दिल्ली में आम बजट 2026-27 की घोषणा का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि भारत वैश्विक ज्ञान केंद्र बन सके।
आईआईटी और आईआईएम जैसे शीर्ष संस्थानों में सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव प्रमुख है। इससे छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे। साथ ही, स्टेट प्राइवेट और डीम्ड विश्वविद्यालयों के लिए कंपनियों से 10 प्रतिशत सीएसआर फंड अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है।
ये फंड स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, एआई आधारित लर्निंग और आधुनिक लैब स्थापित करने में मदद करेंगे। शिक्षा विकास की कुंजी है, लेकिन भारत जीडीपी का मात्र 4-5 प्रतिशत खर्च करता है, जबकि विकसित देश 10 प्रतिशत लगाते हैं।
युवा आबादी को देखते हुए बजट वृद्धि जरूरी है। डिजिटल डिवाइड मिटाने के लिए बाजार-उपयोगी स्किल्स से शिक्षा जोड़नी होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को सुबह 11 बजे बजट पेश करेंगी, जो 2000 के बाद पहली बार रविवार को होगा।