
नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर इस गणतंत्र दिवस की सबसे रोमांचक झांकी होगी भारतीय सशस्त्र बलों की त्रि-सेवा प्रदर्शनी। ‘ऑपरेशन सिंदूर: संयुक्तता से विजय’ नामक यह झांकी भारत की नई सैन्य रणनीति को जीवंत रूप से प्रस्तुत करेगी। इसमें सटीक प्रहार, तीनों सेनाओं का बेहतरीन समन्वय और स्वदेशी हथियारों की ताकत को जीत का मूल मंत्र बताया गया है।
यह झांकी स्पष्ट संदेश देती है कि भारत अब निर्णायक, एकीकृत और आत्मनिर्भर सैन्य महाशक्ति बन चुका है। गत वर्ष ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान व पीओके में नौ आतंकी अड्डों का सफाया इसकी मिसाल है। नौसेना की शुरुआत से समुद्री वर्चस्व, थलसेना के एम-777 तोपों की सटीक फायरिंग, आकाश मिसाइल प्रणाली की हवाई ढाल—सब कुछ क्रमबद्ध तरीके से चित्रित है।
झांकी का मध्य भाग नई सुरक्षा नीति को उजागर करता है—तेजी से कार्रवाई, नियंत्रित दबाव और बिना चूके प्रहार। हारोप ड्रोन दुश्मन रडार नष्ट करते हैं, राफेल की स्कैल्प मिसाइलें आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करती हैं, जबकि सुखोई से ब्रह्मोस मिसाइल मजबूत शेल्टर उड़ाती है।
चरमोत्कर्ष में एस-400 सिस्टम 350 किमी दूर एयरबोर्न थ्रेट को ध्वस्त करता दिखाया गया है। यह दर्शाता है कि भारत पहले निगरानी करता है, पहले निर्णय लेता है और पहले हमला बोलता है। ऑपरेशन सिंदूर तीनों सेनाओं के परिपक्व तालमेल का प्रतीक है, जहां खुफिया सूचनाओं से सटीक लक्ष्य चयन होता है।
आतंक के संरक्षकों को कड़ा संदेश है—तेज, सटीक और अटल जवाब मिलेगा। स्वदेशी रक्षा प्रणालियां अब वैश्विक स्तर पर अग्रणी हैं। त्रि-सेवा समन्वय, सिविल-मिलिट्री सहयोग और रीयल टाइम ऑपरेशन भारत की सैन्य विश्वसनीयता की नींव हैं। यह झांकी भारत का रणनीतिक ऐलान है—संयुक्तता ही विजय का मार्ग।