
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा ‘जी राम जी’ योजना का नाम न लेने से राजनीतिक घमासान मच गया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ल ने इसे राहुल पर मुगल सोच हावी होने का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि प्रभु राम का उल्लेख होते ही नाम टालना उनकी मानसिकता को उजागर करता है।
शुक्ल ने याद दिलाया कि राहुल बाबर की कब्र पर झुकते हैं, लेकिन भगवान राम का नाम लेने में हिचकते हैं। यह भारतीय संस्कृति से उनका दूरी दर्शाता है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद शांभवी चौधरी ने भी राहुल की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राहुल राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखाते।
चौधरी के अनुसार, राहुल बिना अध्ययन के जनता को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं। विधेयकों पर चर्चा हो या सदन की बहस, वे तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं। ‘जी राम जी’ योजना को लेकर भी वे गलत प्रचार फैला रहे हैं।
उन्होंने योजना का बचाव करते हुए कहा कि यह महात्मा गांधी के ग्रामीण सशक्तिकरण के विचार पर आधारित है। सरकार समय-समय पर इसकी समीक्षा कर सुधार करती है, जो किसानों के हित में है। यह विवाद विपक्ष और सत्ताधारी गठबंधन के बीच गहरे मतभेदों को रेखांकित करता है।
ग्रामीण विकास और सांस्कृतिक मूल्यों पर NDA का जोर राहुल की रणनीति से टकरा रहा है। आने वाले चुनावों में यह मुद्दा गरमाता नजर आ रहा है।