
नई दिल्ली में भाजपा मुख्यालय पर शुक्रवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस वार्ता में कांग्रेस और टीएमसी को इतिहास के आईने में घेर लिया। उन्होंने कहा कि नेताजी ने अंग्रेजों के सपनों को चूर-चूर कर दिया था, फिर भी उनके योगदान को मिटाने के प्रयास होते रहे।
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से सवाल करते हुए त्रिवेदी बोले, ‘आपकी पार्टी कांग्रेस से ही निकली है, इतने वर्षों तक नेताजी को सम्मान क्यों नहीं दिया? अगर सच्चा सम्मान है तो नाम से कांग्रेस हटाइए, वरना बंगाल की जनता आपको जड़ से उखाड़ फेंकेगी।’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि 2018 में आजाद हिंद फौज के सैनिकों को गणतंत्र दिवस परेड में सम्मानित किया गया। इंडिया गेट पर नेताजी की मूर्ति पुनः स्थापित हुई। किसी अन्य दल ने ऐसा नहीं किया।
त्रिवेदी ने नेहरू के 15 अगस्त शपथ को माउंटबेटन के अधीन बताया और नेताजी को पूर्ण स्वतंत्रता का प्रतीक माना। डॉ. अंबेडकर के हवाले से कहा कि आईएनए ने अंग्रेजों की सैनिक निष्ठा भंग की। द्वितीय विश्व युद्ध में कांग्रेस ने दबाव क्यों नहीं बनाया? 1942 के प्रस्ताव में ब्रिटिश सहयोग की बात कही गई। 1931 से 1947 तक प्रमुख आंदोलन क्यों नहीं?
यह प्रकरण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की बहस को ताजा करता है, जहां भाजपा नेताजी को अपना गौरव मान रही है।