
टोक्यो में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला हुआ जब प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने संसद के निचले सदन को भंग कर दिया। यह कदम साठ वर्षों में किसी नियमित सत्र की शुरुआत में पहली बार उठाया गया है। अब 8 फरवरी को मध्यावधि आम चुनाव होंगे।
महंगाई ने जोर पकड़ लिया है, खासकर खाद्य पदार्थों के दामों में उछाल ने परिवारों को परेशान कर दिया। सत्ताधारी दल खाने-पीने की चीजों पर उपभोग कर को अस्थायी रूप से निलंबित करने का वादा कर रहा है, जबकि विपक्ष सभी उत्पादों पर इसे समाप्त करने की मांग कर रहा। एलडीपी पर स्लश फंड घोटाले ने राजनीति और धन के मुद्दे को गरमा दिया है। विदेशी निवासी और पर्यटन से जुड़े सवाल भी चुनावी रणनीतियों में शामिल हो सकते हैं।
ताकाइची ने अक्टूबर 2025 में पद संभाला था, लेकिन उन्हें जनसमर्थन की कमी महसूस हो रही। उनकी कैबिनेट की लोकप्रियता भले ऊंची हो, निचले सदन में सत्ताधारी गठबंधन का बहुमत पतला है और ऊपरी सदन में अल्पमत। किसी विधेयक को पारित कराने के लिए विपक्ष का सहारा जरूरी।
विपक्ष ने ताकाइची पर आरोप लगाया कि वे अप्रैल 2026 के वित्तीय वर्ष के प्रारंभिक बजट से पूर्व चुनाव करवा रही हैं। राजनीतिक चालबाजी का इल्जाम लगाते हुए उन्होंने आलोचना की।
राजनीतिक सफर की बात करें तो ताकाइची 1993 में निर्दलीय के रूप में निर्वाचित हुईं। 1996 में एलडीपी में शामिल हो शिंजो आबे के नेतृत्व में कैबिनेट में आईं। ओकिनावा और उत्तरी क्षेत्र मंत्री रहीं, पहली महिला के रूप में नीति अनुसंधान परिषद की अध्यक्ष बनीं। 2022-24 तक आर्थिक सुरक्षा मंत्री और आंतरिक मामलों में सबसे लंबे समय तक मंत्री का रिकॉर्ड। 185 वोटों से शिंजिरो कोइजुमी को हराकर एलडीपी नेता बनीं।
चुनावी मैदान में दोनों पक्ष जोर-आजमाइश करेंगे। ताकाइची का यह दांव सफल होगा या नहीं, समय बताएगा।