
पराक्रम दिवस पर पूरे देश में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की स्मृति में श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। स्वतंत्रता संग्राम के इस अमर योद्धा को याद करते हुए मोदी आर्काइव ने 1997 का एक पुराना वीडियो साझा किया है, जिसमें नरेंद्र मोदी ने नेताजी की प्रतिमा का अनावरण करते हुए गहन विचार व्यक्त किए थे।
मोदी ने स्पष्ट कहा कि राष्ट्रीय नायक केवल सजावट के लिए नहीं होते। वे भावी पीढ़ियों के चरित्र निर्माण का माध्यम हैं। ‘गांव का मंदिर भक्ति जागृत करता है, वैसे ही नायकों की स्मृतियां राष्ट्रभक्ति का संचार करती हैं,’ उन्होंने जोर देकर कहा।
यह दर्शन आज कार्रवाई में बदल चुका है। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते 2009 में हरिपुरा से ई-ग्राम परियोजना शुरू की, जहां नेताजी ने आजाद हिंद फौज की नींव रखी। प्रधानमंत्री बनकर इंडिया गेट पर भव्य प्रतिमा, रॉस द्वीप का नाम परिवर्तन, 23 जनवरी को पराक्रम दिवस घोषणा, गुप्त फाइलें सार्वजनिक करना और लाल किले में संग्रहालय स्थापना जैसी पहलें कीं।
ये कदम नेताजी की विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हैं। राष्ट्र निर्माण में नायकों की स्मृति अनिवार्य है, जो युवाओं में त्याग और समर्पण की भावना जगाती है। मोदी का यह निरंतर प्रयास देश को मजबूत एकता की ओर ले जा रहा है।