
अयोध्या। प्रयागराज माघ मेले के स्नान के बाद अयोध्या दर्शन के लिए पहुंचे योग गुरु बाबा रामदेव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद पर स्पष्ट राय रखी। उन्होंने हिंदू समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया, क्योंकि सनातन धर्म के दुश्मन पहले से ही सक्रिय हैं। इस्लामीकरण की साजिशें और गजवा-ए-हिंद जैसे खतरे मंडरा रहे हैं। ऐसे में आपसी कलह से बचना होगा।
“हमें शंकराचार्यों को भगवान का स्वरूप मानना चाहिए। किसी भी संत को विवादों से दूर रहना चाहिए,” रामदेव ने कहा। धार्मिक स्थलों पर स्नान या पालकी जैसे मुद्दों पर झगड़ा उचित नहीं। सच्चा साधु अहंकार त्यागकर अपमान सहन करने वाला होता है।
17 जनवरी को मौनी अमावस्या पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद संगम घाट पर पालकी से पहुंचे। पुलिस ने भीड़ प्रबंधन के नाम पर पालकी रोक दी। इससे नाराज शंकराचार्य ने प्रशासन पर पूर्वाग्रह का आरोप लगाया और धरना दे दिया।
अयोध्या में रामदेव ने कहा, “सनातन जीवन में उतरे। राम मर्यादा पर चलने का संकल्प लें।” मेला में पूजा के बाद उन्होंने प्रयागराज को तीर्थराज बताते हुए दिव्य अनुभूति का जिक्र किया। लाखों भक्तों की तपस्या से मन प्रसन्न हुआ।
रामदेव का यह बयान हिंदू एकता को मजबूत करने का प्रयास है, जो बाहरी खतरों से निपटने में कारगर साबित हो सकता है।