
सिलीगुड़ी के हाथी मोड़ पर भाजपा विधायक शंकर घोष ने अपनी एक दिवसीय भूख हड़ताल शुक्रवार को समाप्त कर दी। यह अनशन गुरुवार को शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य पश्चिम बंगाल में विपक्षी विधायकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और विधायक निधि (एमएलएएलएडी) वितरण प्रक्रिया को सरल बनाना था।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए घोष ने कहा कि ब्रिटिश राज में जो अत्याचार हुए, वही आज सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस विपक्ष पर दोहरा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस अन्याय को समाप्त करने के लिए ही यह हड़ताल की गई।
राज्य सरकार पर विपक्षी प्रतिनिधियों को प्रताड़ित करने और विकास कार्यों में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए घोष ने बताया कि निर्वाचन के प्रथम दिन से ही सत्ता का दुरुपयोग देखने को मिला। एमएलएएलएडी निधि पहले ही सीमित है, फिर भी राजनीतिक रोड़े अटकाए जा रहे हैं, जिससे जनकल्याण प्रभावित हो रहा।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ज्ञापन, मुख्य सचिव व विधानसभा अध्यक्ष को पत्र और सिलीगुड़ी महापौर से चर्चा का अनुरोध किया, लेकिन कहीं जवाब नहीं। जिला प्रशासन पर निधि वितरण में देरी का इल्जाम भी लगाया।
घोष ने स्पष्ट किया कि टकराव का इरादा नहीं, बल्कि अधिकारों की हिफाजत और क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करना लक्ष्य है। यह घटना बंगाल की राजनीतिक उथल-पुथल को नई दिशा दे सकती है।