
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को अपने नवीनतम पीस बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण अचानक वापस ले लिया है। ट्रुथ सोशल पर प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को संबोधित पोस्ट में इसकी घोषणा की गई, लेकिन कारण स्पष्ट नहीं किया गया। यह कदम दोनों देशों के बीच ताजा विवाद के बीच आया है।
दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान ट्रंप ने कहा था कि ‘कनाडा अमेरिका की वजह से जीवित है।’ इस बयान को कार्नी ने सिरे से खारिज करते हुए कहा, ‘कनाडा और अमेरिका की शानदार साझेदारी है, लेकिन हम अमेरिका पर निर्भर नहीं। कनाडा कनाडाई होने के कारण प्रगति कर रहा है।’
वैश्विक शांति के लिए गठित इस बोर्ड में 60 देशों को न्योता दिया गया था, जिनमें से 25 ने स्वीकार किया। इसमें इजरायल, बहरीन, मोरक्को, अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बुल्गारिया, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कोसोवो, पाकिस्तान, पराग्वे, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, यूएई, उज्बेकिस्तान, बेलारूस, मिस्र, वियतनाम और मंगोलिया शामिल हैं। आठ इस्लामिक देशों ने भी हामी भरी।
भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को गाजा युद्धविराम के दूसरे चरण के लिए बुलाया गया, लेकिन विदेश मंत्रालय ने विचाराधीन बताया। फ्रांस, ब्रिटेन, चीन, जर्मनी जैसे बड़े देशों ने दूरी बनाई। सदस्यता तीन साल की होगी, स्थायी के लिए 1 अरब डॉलर की राशि का जिक्र है।
यह घटना अमेरिका-कनाडा संबंधों में नई दरार पैदा कर सकती है, जहां व्यापार और सुरक्षा सहयोग पर असर पड़ सकता है। ट्रंप की यह रणनीति वैश्विक मंच पर चर्चा का विषय बनी हुई है।