
हर साल 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मनाई जाती है। 2021 में भारत सरकार ने इसे आधिकारिक तौर पर मान्यता दी, ताकि उनके साहस और बलिदान को याद रखा जाए। सिनेमा जगत ने उनकी गाथा को बड़े पर्दे से लेकर वेब तक जीवंत रखा है।
1966 की बंगाली फिल्म ‘सुभाष चंद्र’ इसका प्रारंभिक उदाहरण है। पीयूष बोस के निर्देशन में समर कुमार ने नेताजी के बचपन, शिक्षा और आईसीएस त्याग को भावुक ढंग से चित्रित किया। यह फिल्म दिखाती है कि कैसे एक होनहार छात्र क्रांतिकारी बना।
2004 में श्याम बेनेगल की ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फॉरगॉटन हीरो’ ने इतिहास रचा। सचिन खेडेकर की शानदार अदाकारी को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। 1941-45 का दौर—नजरबंदी से भागना, आजाद हिंद फौज गठन और ब्रिटिशों से जंग—को संवेदनशीलता से दिखाया गया।
2017 की वेब सीरीज ‘बोस: डेड/अलाइव’ ने मौत के रहस्य को उकसाया। राजकुमार राव ने नेताजी का रोल किया। एकता कपूर की यह सीरीज अनुज धर की किताब पर बनी, जो ताइवान हादसे पर सवाल उठाती है।
2019 में जी बांग्ला की ‘नेताजी’ सीरीज ने युवाओं को लक्ष्य किया, जबकि ‘गुमनामी’ फिल्म ने मुखर्जी आयोग की जांच को रहस्यमय अंदाज में पेश किया। ये रचनाएं नेताजी की प्रेरणा को जीवित रखती हैं।