
पटना के प्रेमचंद रंगशाला में माता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर ‘कर्मयोगिनी माता अहिल्या’ महानाटक का भव्य मंचन हुआ। बिहार संगीत नाटक अकादमी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय सिंन्हा ने माता अहिल्या के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और दीप प्रज्ज्वलित किया।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि माता अहिल्याबाई हमारी सनातन संस्कृति की प्रेरणा स्रोत हैं, जो नई पीढ़ी को भक्ति और स्वाभिमान का संदेश देती हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों से उनकी तुलना करते हुए कहा कि उनके मानवसेवा के भाव आज भी प्रासंगिक हैं। यह नाटक युवाओं को संस्कृति के प्रति जागरूक बनाता है।
सीसीआरटी के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर ने बताया कि हमने महापुरुषों की कहानियों को नाटक के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। रानी दुर्गावती और संत मीराबाई पर पहले नाटक किए, अब अहिल्याबाई पर। नाटक में संगीत, संवाद और भावनाओं से 18वीं सदी की सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों को जीवंत किया गया है।
माता अहिल्याबाई ने राजनीति से लेकर धर्म तक महान कार्य किए, अनेक भव्य मंदिर बनवाए, इसलिए उन्हें कर्मयोगिनी कहा जाता है। छोटी अहिल्या का किरदार निभाने वाली जानवी सिंह ने कहा कि यह भूमिका गर्व की है। नाटक देश के पांच शहरों में मंचित हो चुका है। इससे कम उम्र में जिम्मेदारियां निभाने की सीख मिलती है।
बड़ी अहिल्या बाई बनीं शारा शर्मा ने बताया कि चुनौतियों के बीच भी सेवा भाव रखना उनकी प्रेरणा है। यह नाटक न केवल इतिहास को जीवंत करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श स्थापित करता है।