
बॉलीवुड की दमदार अभिनेत्री रानी मुखर्जी ने अपने 30 साल के करियर के जश्न में कई राज खोले हैं। 1997 में ‘राजा की आएगी बारात’ से डेब्यू करने वाली रानी को शुरुआत में अपनी भारी आवाज की वजह से काफी संघर्ष करना पड़ा। कई निर्देशकों ने उन्हें ठुकरा दिया था।
करण जौहर के साथ खास बातचीत में रानी ने जोहर को धन्यवाद दिया। नए प्रोड्यूसर होने के बावजूद उन्होंने रानी की आवाज पर भरोसा जताया और इसे उनकी ताकत बनने का मौका दिया। इसी भरोसे ने रानी की पहचान को मजबूत किया।
‘गुलाम’ फिल्म का जिक्र करते हुए रानी ने बताया कि आमिर खान के साथ काम करना सपना था, लेकिन उनकी आवाज डब करना दर्दभरा फैसला था। निर्देशक विक्रम भट्ट ने खुलासा किया कि यह फैसला आमिर, मुकेश भट्ट और उनका संयुक्त था।
आमिर ने सफाई दी कि फिल्म की भलाई के लिए कभी-कभी त्याग जरूरी होता है। श्रीदेवी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उनकी कई फिल्मों में डबिंग हुई, लेकिन स्टारडम पर असर नहीं पड़ा।
करण जौहर के समर्थन ने रानी को नई उड़ान दी। दबाव में भी उन्होंने रानी की असली आवाज को फिल्मों में रखा, जो आज उनकी ब्रांड बन चुकी है। रानी का यह सफर संघर्ष और जीत की मिसाल है।