
हर साल 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मनाई जाती है। 2021 में भारत सरकार ने इसे आधिकारिक रूप से घोषित किया, ताकि उनके साहस, देशभक्ति और त्याग को याद किया जाए। आजाद हिंद फौज के संस्थापक ने ब्रिटिश राज के खिलाफ ‘खून दो, आजादी लूंगा’ का नारा दिया। उनका जीवन और लापता होने का रहस्य आज भी प्रेरणा स्रोत है।
नेताजी के जीवन पर बनी फिल्में और सीरीज उनके पराक्रम को जीवंत करती हैं।
श्रीजीत मुखर्जी की ‘गुमनामी’ (2019) में प्रोसेनजीत चटर्जी मुख्य भूमिका में हैं। यह मुखर्जी आयोग की काल्पनिक पड़ताल है, जिसमें नेताजी विमान हादसे से बचकर गुमनामी बाबा बने। चंद्रचूड़ धर सत्य उजागर करने को जूझते हैं।
‘बोस: डेड/अलाइव’ (2017, ऑल्ट बालाजी) में राजकुमार राव नेताजी बने हैं। 1945 ताइवान हादसे के बाद के रहस्य पर बनी यह सीरीज सवाल उठाती है।
महेश मांजरेकर की ‘अमी सुभाष बोलची’ (2011) में मिथुन चक्रवर्ती नेताजी से प्रेरित होकर भ्रष्टाचार से लड़ते हैं।
श्याम बेनेगल की ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फॉरगॉटन हीरो’ (2004) में सचिन खेडेकर 1941-45 के संघर्ष दिखाते हैं।
2019 की बंगाली सीरीज ‘नेताजी’, 1966 की ‘सुभाष चंद्र’ और 1950 की ‘समाधि’ भी उनके जीवन को उकेरती हैं।
ये कृतियां नेताजी के आदर्शों को अमर रखती हैं।