
भारतीय अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। ये देश की जीडीपी में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान देते हैं और 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। लेकिन इन उद्यमों के समक्ष सबसे बड़ी बाधा सस्ता और आसान कर्ज उपलब्ध कराना बना हुआ है। इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एमएसएमई उद्यमियों के लिए कई आकर्षक लोन योजनाएं आरंभ की हैं, जो वित्तीय सहायता के साथ-साथ विकास को गति देती हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) वर्ष 2015 से छोटे गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि व्यवसायों के लिए 10 लाख तक का कर्ज उपलब्ध करा रही है। शिशु (50 हजार तक), किशोर (5 लाख तक) और तरुण (10 लाख तक) श्रेणियों में बंटे इन लोन को बैंक, एनबीएफसी और माइक्रो फाइनेंस संस्थान वितरित करते हैं।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) युवाओं व कारीगरों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करता है। मैन्युफैक्चरिंग के लिए 25 लाख और सेवा क्षेत्र के लिए 10 लाख तक लोन, साथ ही 15-35 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है।
क्रेडिट गारंटी फंड (सीजीटीएमएसई) बिना जमानत के 2 करोड़ तक लोन देता है, जिसमें 85 प्रतिशत तक गारंटी कवर रहती है। तकनीक उन्नयन के लिए सीएलसीएसएस 1 करोड़ तक लोन पर 15 प्रतिशत छूट देती है।
फंड ऑफ फंड्स योजना के 50 हजार करोड़ से विकासशील एमएसएमई को वेंचर कैपिटल मिलता है। सिडबी की स्माइल योजना मशीनरी व विस्तार के लिए सॉफ्ट लोन देती है। 59 मिनट लोन योजना डिजिटल तरीके से 1 लाख से 5 करोड़ तक फंड जल्दी मुहैया कराती है।
ये योजनाएं न केवल बिजनेस स्थापित करने में मदद करती हैं, बल्कि रोजगार व आर्थिक प्रगति को भी बढ़ावा देती हैं। सही उपयोग से उद्यमी अपनी किस्मत खुद लिख सकते हैं।