
तेलंगाना के सूर्यापेट जिले के पलामरी गांव में स्थित श्री ब्रह्मा सरस्वती मंदिर अपनी अद्भुत प्रतिमा के लिए जाना जाता है। बसंत पंचमी के दिन यहां ज्ञान और सृष्टि के देवता ब्रह्मा व मां सरस्वती का संयुक्त आशीर्वाद पाने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ आती है। यह मंदिर 12वीं शताब्दी में काकतीय राजा गणपतिदेव के काल में जागीरदार राजा रामिरेड्डी और बेथिरेड्डी द्वारा निर्मित हुआ था।
मंदिर की सबसे खासियत एक ही पत्थर से उकेरी गई ब्रह्मा व सरस्वती की संयुक्त मूर्ति है, जो काकतीय कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस पर्व पर भक्त मां को पीले वस्त्र चढ़ाते हैं और मनोकामनाएं मांगते हैं। छोटे बच्चों का अक्षराभ्यास यहां की प्रमुख परंपरा है, जो शिक्षा की शुरुआत का प्रतीक है। संगीत प्रेमी अपनी मधुर वाणी से पूजा कर मां की साड़ी पाते हैं।
यह मंदिर साक्षरता, कला व बच्चों के स्वास्थ्य के लिए चमत्कारी माना जाता है। बसंत पंचमी पर पूजा-अनुष्ठान व यज्ञ से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। यह स्थल भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखता है।