
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जिद के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ लफ्जों में कहा है कि यह मामला रूस की चिंता का विषय बिल्कुल नहीं है। क्रेमलिन में बुधवार को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान पुतिन ने डेनमार्क के ग्रीनलैंड के प्रति रवैये पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि डेनमार्क ने हमेशा इस आर्कटिक द्वीप के साथ उपनिवेशिक बर्ताव किया है, जो काफी कठोर रहा है।
ट्रंप का ग्रीनलैंड खरीदने का प्लान डेनमार्क को नागवार गुजरा है। 18वीं शताब्दी में डेनमार्क ने इसे अपना कॉलोनी बनाया था और 1979 में स्वशासन की अनुमति दी। लेकिन रक्षा और विदेश नीति पर अभी भी कोपेनहेगन का नियंत्रण है। अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहां सैन्य अड्डा बना चुका है।
पुतिन ने स्पष्ट किया, ‘यह हमारी परवाह का विषय नहीं। वे खुद आपस में सुलझा लेंगे।’ उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण दिए, जैसे 1867 में अमेरिका ने रूस से अलास्का और 1916 में डेनमार्क से कैरेबियाई क्षेत्र खरीदा। पुतिन ने ग्रीनलैंड की कीमत करीब 1 अरब डॉलर बताई, जो अमेरिका आसानी से चुका सकता है।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी हस्तक्षेप की अफवाहों का खंडन किया। डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने दावोस में दोहराया कि ग्रीनलैंड कभी नहीं बिकेगा। आर्कटिक की पिघलती बर्फ के साथ संसाधनों की होड़ बढ़ रही है, लेकिन पुतिन का रुख रूस को अलग रखता है। यह बयान महाशक्तियों के बीच तनाव की आशंकाओं को कम करता है।