
मुंबई। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन कई बड़े नेता अभी भी वहां जाने से कतरा रहे हैं। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने गुरुवार को इसे वोट बैंक की चाटुकारिता करार देते हुए आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लंबी कानूनी लड़ाई और सामाजिक आंदोलन के बाद बने इस मंदिर पर करोड़ों हिंदुओं को गर्व है, फिर भी कुछ ‘धार्मिक’ नेता मुस्लिम वोट के लालच में आस्था से मुंह मोड़ रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
भारत धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां सभी धर्मों का सम्मान अनिवार्य है, लेकिन बहुसंख्यक समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाना उचित नहीं। निरुपम ने शंकराचार्यों के सम्मान पर जोर देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का विशेष उल्लेख किया। महाराष्ट्र में गौमाता को राजमाता घोषित करने पर उन्होंने आशीर्वाद दिया था, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी उनका आदर करते हैं।
प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर लाखों श्रद्धालुओं के स्नान के दौरान हुई अफरा-तफरी पर निरुपम ने पुलिस व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन शंकराचार्यों का सम्मान अटल होना चाहिए।
आई-पैक घोटाले पर उन्होंने इसे विस्फोटक बताया। यह फर्म विभिन्न दलों को चुनावी रणनीति, प्रत्याशी चयन और जीत दिलाने के लिए मोटी फीस वसूलती है। ईडी की छापेमारी पर कुछ पार्टियों ने आपत्ति जताई थी। अब खुलासा हुआ कि हरियाणा की काल्पनिक कंपनी से 13 करोड़ का लोन लिया गया। निरुपम ने इसे मनी लॉन्ड्रिंग करार दिया और ईडी व पीएमएलए से सख्त जांच की मांग की। इस मामले की गहराई से पड़ताल होनी चाहिए।