
वॉशिंगटन डीसी में आयोजित ड्रग पॉलिसी एग्जीक्यूटिव वर्किंग ग्रुप की पहली बैठक ने भारत और अमेरिका के बीच नारकोटिक्स सहयोग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। 20 से 22 जनवरी 2026 तक चली इस बैठक में दोनों देशों ने सिंथेटिक ओपिओइड्स, नवीन प्रीकर्सर रसायनों तथा डिजिटल मंचों के दुरुपयोग के विरुद्ध संयुक्त रणनीति पर प्रतिबद्धता जताई।
विदेश मंत्रालय ने बैठक की सफलता पर जोर देते हुए कहा कि वैध व्यापार को प्रभावित किए बिना प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने उद्घाटन सत्र में द्विपक्षीय प्रयासों की प्रगति का जायजा लिया।
अमेरिकी दूतावास ने बताया कि क्वात्रा ने राष्ट्रपति ट्रंप के ड्रग कार्यालय की निदेशक सारा कार्टर के साथ अवैध तस्करी और रसायनों के खतरे मिटाने पर बात की। बैठक में सक्रिय समन्वय से लक्षित कार्रवाई पर बल दिया गया।
यह प्रयास पिछले साल जुलाई में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा भंडाफोड़ किए गए अंतरराष्ट्रीय गिरोह की याद दिलाता है। दिल्ली के बंगाली मार्केट के पास वाहन जांच से शुरू हुई यह कार्रवाई चार महाद्वीपों और 10 से अधिक देशों तक फैले नेटवर्क को उजागर कर चुकी थी। गिरोह एन्क्रिप्टेड ऐप्स, क्रिप्टो भुगतान और ड्रॉप-शिपिंग का सहारा ले रहा था।
गृह मंत्री अमित शाह ने वैश्विक ड्रग कार्टेलों के खिलाफ एनसीबी की सफलता का स्वागत किया था। अमेरिकी दूतावास ने भी भारतीय एजेंसियों को अमेरिकी नागरिकों की रक्षा में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
भविष्य में यह समूह खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त अभियानों और नीतिगत सामंजस्य से ड्रग्स के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।