
इस्लामाबाद। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के पाकिस्तानी सरकार के फैसले ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सीनेट में विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने इसे नैतिक रूप से गलत और फिलिस्तीनी हितों के खिलाफ बताया है।
एक्स पर पोस्ट के जरिए अब्बास ने कहा कि गाजा के पुनर्निर्माण के नाम पर बनी यह संस्था वास्तव में फिलिस्तीनियों का शासन अधिकार छीनने का उपकरण है। सुरक्षा, पुनर्निर्माण और राजनीतिक नियंत्रण को बाहरी शक्तियों के हवाले करना नव-औपनिवेशिक मानसिकता को उजागर करता है, जो स्वनिर्णय के अधिकार को चोट पहुंचाएगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि शुरू में सीमित पुनर्निर्माण योजना के रूप में पेश की गई यह पहल अब व्यापक हो चुकी है और संयुक्त राष्ट्र को हाशिए पर धकेलने का प्रयास है।
संविधान संरक्षण आंदोलन के उपाध्यक्ष मुस्तफा नवाज खोखर ने भी सरकार को लताड़ा। उन्होंने कहा कि संसदीय चर्चा या जनभावना जाने बिना यह कदम लोकतंत्र की उपेक्षा दर्शाता है। एक्स पर खोखर ने लिखा कि यह बोर्ड गाजा पर शासन थोपने और यूएन के समानांतर तंत्र बनाने की साजिश है।
खोखर ने चार्टर की आलोचना की, जिसमें ट्रंप को सदस्यों की नियुक्ति-बर्खास्तगी, बैठकें और एजेंडा तय करने का एकछत्र अधिकार है। एक अरब डॉलर देकर स्थायी सदस्यता का प्रावधान इसे धनाढ्यों का क्लब बना देता है।
पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने इसे अविवेकपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि ट्रंप इस माध्यम से अपने एकतरफा फैसलों को वैधता दिलाना चाहते हैं, जबकि बोर्ड का दायरा गाजा से कहीं आगे है।
विदेश मंत्रालय ने यूएनएससी प्रस्ताव 2803 के तहत भागीदारी की घोषणा की थी, ताकि स्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण हो सके।
यह विवाद पाकिस्तान की विदेश नीति पर सवाल खड़े करता है, जहां विपक्ष सरकार की इस ‘गलत भ्रामकता’ को उजागर कर रहा है। आने वाले दिनों में संसद में बहस तेज हो सकती है।