
सर्दियों का आगमन होते ही कई लोगों के घुटनों में दर्द और जोड़ों में अकड़न की शिकायत आम हो जाती है। खासकर वृद्धजनों, गठिया रोगियों और पहले से जोड़ों की समस्या से जूझ रहे व्यक्तियों को यह परेशानी ज्यादा सताती है। ठंडक बढ़ने पर घुटने जकड़ से जाते हैं, चलना-फिरना कठिन लगने लगता है। इसके पीछे मौसम के बदलाव के साथ शरीर में होने वाले कई परिवर्तन जिम्मेदार हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि सर्दी में वायुमंडलीय दबाव घट जाता है, जिससे जोड़ों के आसपास के ऊतकों में सूजन हो जाती है। ठंड से रक्त संचार मंद पड़ जाता है और सायनोवियल द्रव गाढ़ा होकर जोड़ों को चिकनाई देने में असमर्थ हो जाता है। इसके चलते दर्द तेज होता है। साथ ही कम धूप से विटामिन डी की कमी हड्डियों को कमजोर कर देती है।
आयुर्वेद में इसे वात दोष की वृद्धि से जोड़ा जाता है। शुष्क-शीतल मौसम वात को भड़काता है, जो श्लेषक कफ को सुखाकर जोड़ों में रूक्षता और जड़ता पैदा करता है।
इसका आयुर्वेदिक समाधान सरल है। तिल या महानारायण तेल से प्रतिदिन मालिश करें। भिगोई मेथी सुबह खाएं। हल्दी-अदरक का काढ़ा पिएं। गुनगुना पानी, सूर्य स्नान और हल्की व्यायाम अपनाएं। ठंडी सतहों से दूर रहें। गंभीर स्थिति में वैद्य से परामर्श लें। इन उपायों से सर्दी में भी स्वस्थ जोड़ पाएं।