
मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्षों की प्रेरणादायी यात्रा पर बनी फिल्म ‘शतक: संघ के 100 वर्ष’ इतिहास के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक बन गई है। मूल रूप से 110 मिनट लंबी इस फिल्म को विशेषज्ञों की सलाह पर 95 मिनट में ढाल दिया गया, जिसमें 15 मिनट का विवादास्पद हिस्सा हटा दिया गया।
निर्माताओं ने स्पष्ट किया कि भावुक दृश्यों के बावजूद, जिनके पीछे ऐतिहासिक प्रमाण कमजोर थे, उन्हें काटना आवश्यक था। यह कदम संघ की सत्यनिष्ठा को सिनेमा के परदे पर उजागर करता है।
ट्रेलर लॉन्च में आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. मनमोहन वैद्य ने सराहना की, ‘जब तथ्यों से समझौता आम हो रहा है, तब ‘शतक’ सच्चाई की मिसाल पेश करता है।’ फिल्म का उद्देश्य प्रचार नहीं, बल्कि संघ की वास्तविक गाथा प्रस्तुत करना है।
संघ की स्थापना से लेकर सामाजिक कार्य, सांस्कृतिक संरक्षण और वैचारिक विकास तक, फिल्म हर कालखंड को जीवंत बनाती है। गहन चर्चाओं और तथ्य-जांच के बाद हर दृश्य को अंतिम रूप दिया गया।
सामान्य दर्शक भी आसानी से समझ सकें, इसके लिए सरल शैली अपनाई गई है। 19 फरवरी से सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली यह फिल्म दर्शकों को संघ के योगदान से रूबरू कराएगी, जो राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा बनेगी।