
नई दिल्ली में राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब नीति घोटाले से जुड़े ईडी के समन नजरअंदाज करने के मामले में बरी कर दिया है। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने गुरुवार को यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
कोर्ट ने पाया कि प्रवर्तन निदेशालय के आरोप साबित करने में नाकाम रहा। केजरीवाल पर पीएमएलए की धारा 50 के तहत जारी पांच समन का जानबूझकर उल्लंघन करने का इल्जाम था। यह जांच 2021-22 की आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं पर केंद्रित है, जहां ‘साउथ ग्रुप’ पर रिश्वत देकर लाभ उठाने का आरोप है।
मामला सीबीआई की 17 अगस्त 2022 की एफआईआर से शुरू हुआ, जो उपराज्यपाल वीके सक्सेना की शिकायत पर दर्ज की गई। ईडी ने 22 अगस्त को मनी लॉन्ड्रिंग का एंगल जोड़ा। केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी।
इसी तरह, आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान को वक्फ बोर्ड भर्ती मामले में समन न मानने के आरोप से मुक्ति मिली।
यह फैसला केजरीवाल और आप के लिए बड़ी जीत है, जो केंद्र की एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव के आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, मूल शराब नीति जांच जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समन प्रवर्तन पर न्यायिक निगरानी बढ़ाएगा।
आगामी चुनावों से पहले यह विकास आप को मजबूती देता है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी लंबी है।