
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में राजनीतिक हलचल मच गई है। भाजपा विधायक शंकर घोष ने 22 जनवरी को एक दिवसीय भूख हड़ताल शुरू कर दी। उनका मुख्य मुद्दा विपक्षी विधायकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (एमएलएएलएडी) की प्रक्रिया को सरल बनाना है।
घोष ने राज्य सरकार और तृणमूल कांग्रेस पर विपक्षी प्रतिनिधियों को परेशान करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि निर्वाचित होने के पहले दिन से ही अधिकारों का दमन हो रहा है। विकास निधि के उपयोग में राजनीतिक बाधाएं खड़ी की जा रही हैं, जिससे क्षेत्रीय कार्य रुक जाते हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ज्ञापन दिया, मुख्य सचिव व विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं। सिलीगुड़ी मेयर से भी सहयोग नहीं मिला। जिला प्रशासन पर निधि वितरण में देरी का इल्जाम लगाया।
एमएलएएलएडी निधि पहले से सीमित है। इसे रोकना जनहित को नुकसान पहुंचाता है। घोष का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि अधिकारों की सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करना है। भूख हड़ताल अगले दिन तक चलेगी।
यह घटना बंगाल की राजनीति में विपक्ष की दुर्दशा को उजागर करती है। क्या सरकार कदम उठाएगी, या संघर्ष तेज होगा?