
प्रयागराज के माघ मेले में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ दुर्व्यवहार का मामला गरमा गया है। मुंबई से शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने इसे हिंदुत्व का अपमान बताते हुए जमकर निंदा की है। उन्होंने हिंदुत्व के नाम पर राजनीति करने वालों पर तीखा प्रहार किया।
राउत ने कहा कि शंकराचार्य खुलकर अपनी बात रखते हैं, जो कुछ लोगों को खटकती है। लेकिन उनके पद का सम्मान अनिवार्य है। योगी सरकार द्वारा पुलिस की कार्रवाई को चिंताजनक बताते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि हिंदुत्ववादी संगठनों को यह स्वीकार्य कैसे हो सकता है।
देशभर में शंकराचार्यों को राजकीय अतिथि का दर्जा प्राप्त है। महाराष्ट्र में भी उन्हें मुख्यमंत्री आवास पर सम्मानित किया गया था। राउत ने एकनाथ शिंदे की चुप्पी पर चुटकी ली, जब शिंदे सीएम थे तो उन्होंने शंकराचार्य के चरण धोए थे। आज वही मौन हैं।
ऐसे लोग जो हिंदू होने का दावा करते हैं लेकिन विरोध नहीं करते, वे नकली हैं। राउत ने इसे स्वार्थी हिंदुत्व करार दिया। शिवसेना (यूबीटी) इसकी कड़ी निंदा कर रही है और आगे की घटनाओं पर नजर रखेगी। शंकराचार्यों का सम्मान हिंदुत्व की रक्षा का आधार है।