
दावोस। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) 2026 में शीर्ष तकनीकी कंपनियों के अधिकारियों ने साफ कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) नौकरियों पर संकट नहीं लाएगा। यह रूटीन कामों को स्वचालित कर इंसानों को रचनात्मक भूमिकाओं के लिए तैयार करेगा।
वर्करा के संस्थापक कियान गोहर ने जोर दिया कि एआई को सहकर्मी न कहें। ‘यह खास कार्यों में माहिर है, लेकिन इंसानी बहुमुखी प्रतिभा की बराबरी नहीं कर सकता।’ लोग दर्जनों जिम्मेदारियां एक साथ निभाते हैं, एआई नहीं।
पहले के आशंकाएं गलत साबित हुईं कि एआई लाखों नौकरियां निगल लेगा।
हिप्पोक्रेटिक एआई के मुंजाल शाह ने भविष्य की तस्वीर पेश की- ‘8 अरब लोग और 80 अरब एआई सिस्टम।’ ये नए अवसर पैदा करेंगे।
उन्होंने गर्मी की लहर में एआई के उदाहरण दिए, जिसने हजारों को फोन कर सुरक्षित सलाह दी। ‘कड़े परीक्षण जरूरी हैं, जहां एआई आपस में जांच करते हैं।’
अमिनी की केट कैलॉट बोलीं, एआई महज उपकरण है। इसमें इंसानी विवेक या मूल्य नहीं।
बीसीजी के क्रिस्टोफ श्वाइजर ने कहा, एआई कभी सहकर्मी जैसा लगता है। सफलता प्रक्रियाओं में बदलाव पर टिकी है। इसे प्रबंधन की जिम्मेदारी बनाएं।
एचपी के एनरिक लोरस ने संतुलन की बात की। कॉल सेंटरों में एआई ने सटीकता और संतुष्टि बढ़ाई।
डब्ल्यूईएफ का संदेश साफ- एआई सहायक बनेगा, प्रतिस्पर्धी नहीं।