
संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद के सुधार को लेकर जी4 देशों ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान के इस गठबंधन ने चेतावनी दी है कि देरी से विश्व भर में चल रहे संघर्षों में लोगों की तकलीफें और बढ़ेंगी। इंटर-गवर्नमेंटल नेगोशिएशंस (आईजीएन) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि हर पल कीमती है क्योंकि निर्दोष जिंदगियां खतरे में हैं।
जी4 ने परिषद का आकार 15 से बढ़ाकर 25-26 करने का मॉडल पेश किया, जिसमें छह नई स्थायी सीटें शामिल हैं। दो अफ्रीका, दो एशिया-प्रशांत (भारत-जापान), एक लैटिन अमेरिका (ब्राजील) और एक पश्चिमी यूरोप (जर्मनी) को आवंटित। नई अस्थायी सीटें भी क्षेत्रीय संतुलन सुनिश्चित करेंगी।
हरीश ने यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस (यूएफसी) समूह की रुकावटों की आलोचना की, जो टेक्स्ट-आधारित चर्चा को रोक रहा है। उन्होंने धार्मिक आधार पर सीटों का प्रस्ताव खारिज किया। अफ्रीका के लिए स्थायी सीटों का व्यापक समर्थन होने पर भी विरोध को हरीश ने अन्यायपूर्ण बताया।
जापान के यामाजाकी काजुयुकी ने एशिया-प्रशांत के कम प्रतिनिधित्व पर जोर दिया। जी4 का यह मॉडल वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करता है। यदि सुधार नहीं हुए तो संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता पर सवाल उठेंगे।