
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। 23 जनवरी को बसंत पंचमी के पावन अवसर पर हिंदू समुदाय की पूजा-अर्चना और मुस्लिम समुदाय की शुक्रवार की नमाज दोनों की अनुमति दे दी गई है। कोर्ट ने हालांकि व्यवस्था में सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं ताकि दोनों पक्षों की भावनाओं का सम्मान हो सके।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि बसंत पंचमी पर पूरे परिसर में मां सरस्वती की पूजा हो और नमाज पर रोक लगे। उनका कहना था कि यह दिन हिंदू मान्यताओं में अत्यंत पवित्र है और पूजा सूर्योदय से सूर्यास्त तक चलती है।
वहीं, मस्जिद कमेटी के वकील सलमान खुर्शीद ने पूर्व की परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि तीन बार पहले भी ऐसा हुआ जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी और दोनों ने शांतिपूर्वक अनुष्ठान किए। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद संतुलित रुख अपनाया।
नमाज दोपहर एक से तीन बजे तक अदा की जा सकेगी। इसके लिए परिसर में ही अलग स्थान चिह्नित किया गया है, विशेष पास जारी होंगे और प्रवेश-निकास के अलग द्वार बनेंगे। पूजा के लिए कोई समय सीमा नहीं, हिंदू पक्ष को भी समर्पित क्षेत्र मिलेगा। मध्य प्रदेश सरकार ने आश्वासन दिया कि कानून-व्यवस्था चाक-चौबंद रहेगी।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि शांति और सौहार्द सर्वोपरि है। मामले की मूल सुनवाई अलग रहेगी, फिलहाल बसंत पंचमी के इंतजाम पर फोकस। यह फैसला धार्मिक विवादों में न्यायिक हस्तक्षेप का बेहतरीन उदाहरण है।