
नई दिल्ली में 2000 के लाल किला आतंकी हमले के दोषी मोहम्मद आरिफ उर्फ अशफाक के मामले ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी क्यूरेटिव याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस भेज दिया है। पहले उनकी पुनर्विचार और क्यूरेटिव याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं, लेकिन एक हालिया फैसले के आधार पर अब नई सुनवाई का मौका मिला है।
लश्कर-ए-तैयबा का यह पाकिस्तानी आतंकी 2011 में फांसी की सजा पा चुका है। राष्ट्रपति के पास दया याचिका भी असफल रही। 22 दिसंबर 2000 को लाल किले में छह लश्कर आतंकियों ने गोलीबारी की, जिसमें राजपूताना राइफल्स के दो जवान उमा शंकर और अशोक कुमार तथा नागरिक अब्दुल्ला ठाकुर की मौत हो गई।
दिल्ली पुलिस ने 26 दिसंबर को जामिया नगर से अशफाक और पत्नी रहमाना को गिरफ्तार किया। 2001 में 21 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई। आठ फरार, तीन एनकाउंटर में मारे गए। 2005 में ट्रायल कोर्ट ने अशफाक को फांसी, रहमाना को सात साल, नाजिर और फारूक कासिद को उम्रकैद तथा अन्य तीन को सात-सात साल की सजा सुनाई।
यह मामला न्यायिक प्रक्रिया की गहराई को दर्शाता है, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा और कानूनी अधिकारों का संतुलन बना रहा है। दिल्ली पुलिस का जवाब तय करेगा आगे की राह।