
नई दिल्ली। रामलला प्राण प्रतिष्ठा की तीसरी वर्षगांठ पर मोदी आर्काइव ने एक ऐतिहासिक लेख साझा किया है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 18 नवंबर 1989 का लेख है, जो गुजराती में ‘अनिकेत’ नाम से साधना के ‘अक्षर उपवन’ में प्रकाशित हुआ था। एक्स पर पोस्ट के जरिए यह राम शिलान्यास की यादें ताजा करता है।
मोदी ने लिखा कि आजाद भारत में पहली बार हिंदू विजय की ओर कदम बढ़े। 9-10 नवंबर 1989 हिंदू चेतना के स्वर्णिम पल हैं। अयोध्या की यह घटना 450 वर्ष की गुलामी पर प्रहार थी, सांस्कृतिक स्वतंत्रता की शुरुआत।
लेख में कांग्रेस की अल्पसंख्यक तुष्टिकरण नीति पर करारा प्रहार है। 1947 से रामजन्मभूमि मांग को ठुकराया, 1982 के रथयात्रा रोकीं, मंदिर ताला 40 साल बंद रखा। साधु-संतों के दबाव में झुकीं।
शिलापूजन पर धमकियां दीं, लेकिन देशभर शिलाएं पूजी गईं। पुलिस-सेना तैनात की, संतों को भटकाने की कोशिशें कीं, पर हिंदू अटल रहे। शोभायात्राएं निकलीं, प्रतिबंध हवा हुए।
यह सांस्कृतिक शक्ति की राजनीतिक सत्ता पर जीत थी। कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता का पोल खुला। आज राम मंदिर इस संघर्ष का प्रतीक है, जो मोदी के दृष्टिकोण को साकार करता है।