
सर्दी के मौसम में सिंघाड़ा बाजारों में आसानी से उपलब्ध होता है और इसके फायदे अनगिनत हैं। यह छोटा सा फल न केवल स्वादिष्ट है बल्कि थायरॉइड, उच्च रक्तचाप और पाचन संबंधी परेशानियों के लिए रामबाण साबित होता है। लोग इसे कच्चा चबाते हैं, उबालकर मसालों के साथ खाते हैं या आटे से स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करते हैं।
सिंघाड़े में आयोडीन, पोटेशियम, मैंगनीज, फाइबर और विटामिन्स की भरमार है। आयोडीन थायरॉइड हार्मोन के निर्माण में सहायक है, वहीं मैंगनीज व पोटेशियम टी4 को टी3 में परिवर्तित करने में मदद करते हैं। यह प्रक्रिया थायरॉइड के सुचारू कार्य के लिए जरूरी है। थायरॉइड रोगियों के लिए यह फल वरदान है क्योंकि यह सूजन कम करता है और ऊर्जा स्तर बनाए रखता है।
इसके अलावा, पोटेशियम की मौजूदगी रक्तचाप को नियंत्रित रखती है, जो हृदय को मजबूत बनाती है। अतिरिक्त पानी की निकासी में भी सहायक, सिंघाड़ा एडिमा से राहत दिलाता है। पेट की समस्याओं जैसे कब्ज और अपच से मुक्ति दिलाने में भी प्रभावी।
सर्दियों में इसे नियमित रूप से आहार में शामिल करें। कच्चा, भुना या आटे से बने हलवे से पोषण लें। हालांकि, चिकित्सकीय सलाह अनिवार्य है। सिंघाड़ा साबित करता है कि साधारण फल भी असाधारण लाभ दे सकते हैं।