
आज की भागमभाग भरी जिंदगी में मोबाइल, लैपटॉप और गलत खान-पान ने शरीर को खोखला कर दिया है। पेट फूलना, गैस, कब्ज, बेचैनी, जोड़ों की तकलीफ और नींद की कमी जैसी परेशानियां आम हो गई हैं। आयुर्वेद कहता है कि ये वायु तत्व के असंतुलन के संकेत हैं, जो पंचभूतों से बने शरीर में गड़बड़ी पैदा करते हैं।
वायु मुद्रा इसी असंतुलन को ठीक करने का सरल उपाय है। अंगूठा अग्नि का प्रतीक है, जो तर्जनी उंगली (वायु) को दबाकर नियंत्रण करता है। शांत स्थान पर बैठें, रीढ़ सीधी रखें, आंखें बंद करें। तर्जनी को अंगूठे के आधार पर दबाएं, बाकी उंगलियां फैलाएं। सामान्य सांस लें। रोज 15-20 मिनट करें, सुबह खाली पेट सर्वोत्तम।
यह मुद्रा तंत्रिका तंत्र को शांत करती है, तनाव और घबराहट दूर करती है। पाचन सुधरता है, आंतों की फंसी हवा बाहर निकलती है, पेट हल्का होता है। रक्त प्रवाह बेहतर होने से जोड़ों को पोषण मिलता है, दर्द कम होता है।
नियमित अभ्यास से ऊर्जा संतुलित रहती है, बीमारियां दूर रहती हैं। यह योगिक चमत्कार आपकी सेहत को नई जान देगा।