
वाराणसी के पावन घाटों पर एक अनोखा नजारा देखने को मिला जब रूस से आए मरीना और कॉन्स्टेंटिन ने 11 साल पुरानी शादी को हिंदू रीति-रिवाजों से मजबूत करने के लिए दूसरी बार विवाह रचा। गंगा तटवर्ती मंदिर में वैदिक मंत्रों के बीच सात फेरे लेकर इस दंपति ने भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा जाहिर की।
दुल्हन मरीना ने सिल्क साड़ी और दूल्हा कॉन्स्टेंटिन ने कुर्ता-पायजामा धारण कर रस्में निभाईं। पंडित शिवकांत पांडे ने बताया कि इस रूसी जोड़े में हिंदू धर्म के प्रति गजब की आस्था है। उन्होंने मांग भरने से लेकर फेरों तक सभी परंपराओं का पालन किया।
मरीना ने कहा, ‘हमारी पहली शादी रूस में हुई थी, लेकिन काशी का कल्चर और विवाह की रीतियां हमें इतना भा गया कि हमने दोबारा शादी का फैसला लिया। यहां की वाइब अद्भुत है।’ कॉन्स्टेंटिन ने भी शहर की संस्कृति की तारीफ की।
सनातन धर्म की ओर विदेशियों का आकर्षण बढ़ रहा है। काशी से हरिद्वार तक पर्यटक योग, आयुर्वेद और शास्त्रों की ओर रुख कर रहे हैं। यह घटना उसी का जीता-जागता उदाहरण है, जो सांस्कृतिक एकता को दर्शाती है। दंपति गंगा आशीर्वाद लेकर बेहद प्रसन्न दिखे।
