
नई दिल्ली। केंद्र सरकार की सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) गुरुवार को 11 वर्ष की हो गई। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत 22 जनवरी 2015 को शुरू हुई यह योजना बालिकाओं के सशक्तिकरण का मजबूत आधार बन चुकी है। कम जोखिम वाली इस बचत योजना में मूलधन पर सरकारी गारंटी और 8.2 प्रतिशत ब्याज दर मिल रही है।
बालिका के जन्म से 10 वर्ष की उम्र तक किसी भी समय डाकघर या अधिकृत बैंकों में खाता खोला जा सकता है। एक बालिका के लिए एक ही खाता और परिवार में अधिकतम दो खाते की सीमा है, लेकिन जुड़वां या तिगुना बच्चों के मामले में विशेष छूट उपलब्ध। 18 वर्ष तक अभिभावक खाते का संचालन करते हैं, उसके बाद बालिका स्वयं नियंत्रण ले सकती है।
शिक्षा और विवाह जैसे बड़े खर्चों के लिए यह योजना आदर्श है। देशभर में 4.53 करोड़ खाते खुले हैं, जिनमें 3.33 लाख करोड़ रुपये जमा हो चुके। यह न केवल आर्थिक सुरक्षा देती है, बल्कि बालिकाओं में आत्मविश्वास जगाती है।
इसी दिन शुरू हुए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान ने लिंगानुपात सुधारने, स्कूली नामांकन बढ़ाने और समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महिला एवं बाल विकास, शिक्षा व स्वास्थ्य मंत्रालयों के संयुक्त प्रयास से यह अभियान सफल हो रहा है।
11 वर्षों में एसएसवाई ने लाखों परिवारों को आत्मनिर्भर बनाया है। आगे भी यह बालिकाओं के सपनों को पंख लगाती रहेगी।