
भोपाल। महाकुंभ में मॉडलिंग छोड़ आध्यात्मिक पथ अपनाने वाली हर्षा रिछारिया एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने ग्लैमर की दुनिया में लौटने का फैसला किया है, क्योंकि गद्दी पर बैठे कुछ लोग उनकी प्रगति पसंद नहीं करते।
बातचीत में हर्षा ने कहा कि वे किसी का नाम नहीं लेंगी, लेकिन परेशानियां कम नहीं हुईं। उन्होंने समझाया कि संन्यासी जीवन दान पर निर्भर होता है, जो उनके लिए संभव नहीं। धर्म प्रचार के लिए स्वयं के संसाधन जरूरी हैं, इसलिए वे काम संभालकर जिम्मेदारियां निभाएंगी।
रोजमर्रा के खर्च के लिए पैसे चाहिए। उधार कितने दिन चलेगा? उनके फैसलों पर सवाल उठते हैं, लेकिन सहयोग शून्य है। कुछ साधु-संत लगातार बाधाएं डाल रहे हैं, जो गलत है।
सनातन धर्म छोड़ने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि वे तो इसमें जन्मी हैं, इसे अपनाने वाली कौन? युवाओं, बेटियों को जोड़ने के कार्यक्रम स्थगित किए, धर्म नहीं छोड़ा।
महाकुंभ बाद समाजसेवा के सपने टूटे। गद्दी वाले आगे बढ़ने नहीं देते। यह आध्यात्मिक जगत की कड़वी सच्चाई उजागर करता है।