
सोल की अदालत ने दक्षिण कोरिया के पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू को बुधवार को 23 साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति यून सूक येओल के मार्शल लॉ आदेश को बगावत करार दिया, जिसमें हान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे पहले यून को इसी मामले में पांच साल की कैद हुई थी।
विशेष अभियोजक ने 15 साल की मांग की थी, लेकिन अदालत ने आरोपों की गंभीरता देखते हुए सजा बढ़ा दी। हान पर बगावत को बढ़ावा देना, झूठी गवाही और डिक्री को वैध बनाने के प्रयास के इल्जाम थे। जज ली जिन-ग्वान ने हान को हिरासत में लेने का आदेश दिया, सबूत मिटाने का खतरा बताते हुए।
3 दिसंबर 2024 को घोषित मार्शल लॉ छह घंटे में विधानसभा ने उलट दिया। हान ने डिक्री से पहले कैबिनेट बैठक बुलाई, विरोध नहीं किया और गृह मंत्री को यून के आदेश लागू करने को भड़काया। मीडिया के खिलाफ बिजली-पानी काटने की योजना में भी उनका हाथ था।
जज ने कहा, ‘प्रधानमंत्री का कर्तव्य संविधान की रक्षा करना था, लेकिन उन्होंने विद्रोह में साथ दिया।’ हान ने आरोप नकारे, कहा उन्हें मार्शल लॉ की पूरी योजना की जानकारी नहीं थी।
यह सजा यून के मुकदमे को प्रभावित कर सकती है, जहां मौत की सजा मांगी गई है। फैसला 19 फरवरी को आएगा। दक्षिण कोरिया की लोकतांत्रिक व्यवस्था ने इस संकट में मजबूती दिखाई, न्याय ने नेताओं को जवाबदेह बनाया।