
आजकल चेहरे की खूबसूरती के लिए लोग महंगे कॉस्मेटिक्स पर पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं। लेकिन आयुर्वेद का मत अलग है। यह कहता है कि सच्ची रंगत लीवर यानी यकृत के स्वास्थ्य से आती है। रंजक पित्त का संतुलन ही त्वचा को चमकदार बनाता है।
यकृत और प्लीहा में स्थित रंजक पित्त पित्त दोष का महत्वपूर्ण भाग है। यह भोजन के रस को रक्त में परिवर्तित करता है। संतुलित रहने पर खून शुद्ध होता है, हीमोग्लोबिन बढ़ता है और चेहरा निखर उठता है।
अनियंत्रित रंजक पित्त से पीलापन, काले दाग, मुहांसे और बेजानी त्वचा की समस्या हो जाती है। जंक फूड, रात जागरण, शराब, धूम्रपान और तनाव इसके प्रमुख कारण हैं।
आयुर्वेद में आहार को प्राथमिकता दी जाती है। आंवला, अनार, चुकंदर, मुनक्का और नारियल पानी रक्त शोधन करते हैं। गिलोय, भृंगराज व भूमि आंवला यकृत को मजबूत बनाते हैं। क्रोध नियंत्रण भी आवश्यक है।
इन उपायों से न केवल त्वचा सुंदर होगी, बल्कि समग्र स्वास्थ्य में सुधार आएगा। आयुर्वेद की इस विद्या को अपनाएं और प्राकृतिक सुंदरता पाएं।