
1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट 2026-27 से ठीक पहले देश के विभिन्न क्षेत्रों में बहस छिड़ी हुई है। रियल एस्टेट से लेकर शेयर बाजार, छोटे उद्योगों, महिलाओं और बुजुर्गों तक सभी की निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हैं। जानकारों ने अपनी राय साझा की है कि इस बजट से क्या बदलाव आ सकते हैं।
ईस्टर्न बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के गोविंद अग्रवाल बताते हैं कि रियल एस्टेट जीडीपी का 7 प्रतिशत हिस्सा है और रोजगार में कृषि के बाद सबसे आगे। सस्ते घरों की सीमा 45 लाख से बढ़ाकर 75 लाख करनी चाहिए। जीएसटी इनपुट क्रेडिट मिले तो निर्माण सस्ता होगा, मकान सुलभ। ब्याज दरें कम हों और होम लोन पर टैक्स छूट बढ़े।
भागलपुर के सीए प्रदीप झुनझुनवाला कहते हैं, बजट जन-जन तक पहुंचे। वरिष्ठों के लिए टीडीएस और टैक्स मुक्त आय सीमा बढ़े। प्रॉपर्टी टैक्स छूट 1 करोड़ हो, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन में 5 लाख तक राहत। स्थानीय बुनकरों, टेक्सटाइल, कृषि और पर्यटन को प्राथमिकता मिले।
टैक्स विशेषज्ञ संजय कुमार सकल वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच शेयर बाजार की गिरावट पर चिंता जताते हैं। एलटीसीजी टैक्स 12.5 प्रतिशत से घटे तो निवेशक लौटेंगे।
महिला उद्यमी प्रिया सोनी योजनाओं की सराहना करती हैं लेकिन ग्रामीण जागरूकता पर जोर देती हैं। पोस्टर और अभियान चलें, मातृत्व सहायता बढ़े, महिलाओं के लिए मार्केटिंग और बाजार व्यवस्था हो।
यह बजट विकास और समावेशिता का संतुलन बना सकता है, आधी आबादी को नई उड़ान देगा।