
बॉलीवुड के हास्य जगत में नीरज वोरा का नाम एक मील का पत्थर है। 22 जनवरी 1963 को गुजरात के भुज में जन्मे नीरज के पिता पंडित विनायक राय ननलाल वोरा शास्त्रीय संगीतकार थे, जिन्होंने बचपन से ही उन्हें कला का पाठ पढ़ाया। मुंबई के सेंटाक्रूज में गुजरा उनका बचपन छह साल की उम्र से ही थिएटर की दुनिया में उतर गया। कॉलेज में ड्रामा अवॉर्ड्स ने उनके सफर को मजबूत किया।
1984 में ‘होली’ से फिल्मी सफर शुरू हुआ, जहां आमिर खान, नसीरुद्दीन शाह जैसे दिग्गजों के साथ काम किया। टीवी शोज ‘सर्कस’ और ‘चोटी बड़ी बातें’ ने पहचान दी, लेकिन 1995 की ‘रंगीला’ के डायलॉग्स ने उन्हें स्टार बना दिया।
लेखन में कमाल दिखाया ‘हेरा फेरी’ (2000) से, जहां अक्षय कुमार, परेश रावल व सुनील शेट्टी के करियर को नई उड़ान मिली। डायलॉग्स की धार ने दर्शकों को बांध लिया। ‘फिर हेरा फेरी’ (2006) और ‘बोल बच्चन’ (2012) ने इस जादू को दोहराया। निर्देशन में ‘खिलाड़ी 420’, अभिनय में ‘बादशाह’, ‘खट्टा-मीठा’ जैसी फिल्में यादगार रहीं।
उनकी कॉमेडी साफ-सुथरी और पारिवारिक थी। 2016 में ब्रेन स्ट्रोक के बाद 13 माह कोमा में रहे। 14 दिसंबर 2017 को 54 साल की उम्र में निधन। पीएम मोदी समेत पूरे बॉलीवुड ने श्रद्धांजलि दी। उनकी फिल्में आज भी हंसाती रहेंगी।