
अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अगले आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने और अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया गया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकारों को सख्त हिदायत दी।
कोर्ट ने अपनी निगरानी में एक विशेषज्ञ समिति बनाने का फैसला सुनाया। इस समिति में पर्यावरण, विज्ञान और खनन क्षेत्र के जानकार सदस्य होंगे, जो अरावली की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। सीजेआई ने स्पष्ट कहा कि समिति पूरी तरह न्यायालय के मार्गदर्शन में कार्य करेगी।
राजस्थान के किसानों के वकील राजू रामचंद्रन ने 2024 के जस्टिस ओका बेंच के आदेशों का उल्लंघन बताते हुए खनन पट्टों और वृक्षों की कटाई पर रोक की मांग की। कोर्ट ने गहरी चिंता जताई और अवैध खनन को अपराध करार दिया। अधिकारियों को अपनी मशीनरी सक्रिय करने को कहा गया।
सभी पक्षों से पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों व खनन विशेषज्ञों के नाम सुझाने को कहा गया। जंगल और अरावली की परिभाषा पर अलग जांच होगी। एमिकस क्यूरी को परिभाषा पर नोट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।
पिछले आदेशों को स्थगित रखते हुए कोर्ट ने अरावली को बचाने की दिशा में मजबूत इरादा दिखाया। यह फैसला पर्यावरण संरक्षण में न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करता है।