
नई दिल्ली से बड़ी खबर आ रही है। इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण एवं विकास पुरस्कार 2025 की घोषणा हो गई है। अंतरराष्ट्रीय निर्णायक मंडल ने अफ्रीका की प्रमुख नेत्री और मानवाधिकार कार्यकर्ता ग्रासा माशेल को यह सम्मान प्रदान करने का निर्णय लिया है।
भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन की अध्यक्षता वाले इस मंडल ने माशेल के जीवनपर्यंत संघर्ष को सराहा है। उन्होंने स्वशासन, मानवाधिकार और वंचितों के उत्थान के लिए समर्पित जीवन जिया है। उनका सपना हमेशा न्यायपूर्ण समाज का रहा, जहां सभी को बराबरी का हक मिले।
माशेल का जन्म 1945 में मोजाम्बिक के ग्रामीण क्षेत्र में हुआ। मिशनरी स्कूलों से शिक्षा ग्रहण करने के बाद लिस्बन विश्वविद्यालय पहुंचीं। वहां स्वतंत्रता की चिंगारी जली। 1973 में लौटकर स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़ीं और शिक्षिका बनीं।
1975 में आजादी के बाद शिक्षा मंत्री रहीं। उनके प्रयासों से स्कूलों में दाखिले दोगुने हो गए—लड़कों का 40 से 90 प्रतिशत, लड़कियों का 75 प्रतिशत।
1990 के दशक में वैश्विक पटल पर चमकीं। संयुक्त राष्ट्र ने बच्चों पर युद्ध प्रभाव की रिपोर्ट सौंपी, जिसने नीतियां बदलीं। नैनसेन पुरस्कार सहित कई सम्मान मिले।
द एल्डर्स की संस्थापक, गर्ल्स नॉट ब्राइड्स में योगदान, संयुक्त राष्ट्र सलाहकार, अफ्रीकी बाल नीति फोरम की संरक्षक—ये हैं उनकी उपलब्धियां। ग्रासा माशेल ट्रस्ट और जिजिले संस्थान महिलाओं व बच्चों के सशक्तिकरण पर केंद्रित। 2018 में डब्ल्यूएचओ गोल्ड मेडल मिला।
शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और मानवीय कार्यों से लाखों प्रेरित। इसी कारण 2025 का पुरस्कार उन्हें।