
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्रीय कैबिनेट ने सामाजिक सुरक्षा और छोटे उद्योगों को मजबूत करने के लिए दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। अटल पेंशन योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक विस्तार देने के साथ इसके प्रचार-प्रसार और स्थिरता के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया गया है। साथ ही, स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता प्रदान करने की मंजूरी मिली है।
ये कदम असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने और एमएसएमई को सस्ते ऋण उपलब्ध कराने पर केंद्रित हैं। 2015 में शुरू हुई अटल पेंशन योजना 60 वर्ष की आयु के बाद 1,000 से 5,000 रुपये मासिक पेंशन की गारंटी देती है। जनवरी 2026 तक इसमें 8.66 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं, जो इसे देश की सामाजिक सुरक्षा की रीढ़ बनाता है।
योजना के विस्तार से पेंशन-आधारित समाज की नींव पड़ेगी और विकसित भारत 2047 का सपना साकार होगा। दूसरी ओर, सिडबी को तीन चरणों में दी जाने वाली यह राशि—2025-26 में 3,000 करोड़, उसके बाद 1,000-1,000 करोड़—बैंक की पूंजी को मजबूत करेगी। इससे डिजिटल ऋण, स्टार्टअप फंडिंग और बिना गारंटी वाले लोन बढ़ सकेंगे।
अनुमान है कि सिडबी की सहायता से एमएसएमई की संख्या 76.26 लाख से 1.02 करोड़ हो जाएगी, जिससे 25.74 लाख नई इकाइयों को लाभ मिलेगा। औसतन चार नौकरियां प्रति इकाई मानें तो 1.12 करोड़ नए रोजगार सृजित होंगे। जोखिम-भारित संपत्तियों के बढ़ने के बावजूद सीआरएआर मजबूत रहेगा।
ये फैसले अर्थव्यवस्था को समावेशी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे, जहां बुजुर्ग सुरक्षित और उद्यमी सशक्त होंगे।