
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की कथा न केवल धार्मिक ग्रंथों तक सीमित रही, बल्कि सिनेमा और टेलीविजन के माध्यम से भी घर-घर पहुंची। अयोध्या राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ पर हम उन सितारों को याद करते हैं, जिन्होंने इस दिव्य किरदार को जीवंत किया।
दक्षिण सिनेमा में एनटीआर ने ‘लव कुश’, ‘श्री रामानजनेय युद्धम’ जैसी फिल्मों में राम का रूप धारण किया। उनके पोते जूनियर एनटीआर ने 1997 की ‘बाला रामायणम’ में बाल रूप में राम का किरदार निभाया, जो राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता रही।
शोभन बाबू की ‘सपूर्ण रामायण’, बालकृष्ण की ‘श्री राम राज्यम’ और सुमन की ‘श्री राम दासू’ ने तेलुगु दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
हिंदी पटल पर अरुण गोविल का 1980 के ‘रामायण’ धारावाहिक अमर है। जितेंद्र की ‘लव कुश’, गुरमीत चौधरी की 2008 ‘रामायण’ और आशीष शर्मा की ‘सिया के राम’ ने नई पीढ़ी को जोड़ा।
प्रभास की ‘आदिपुरुष’ ने आधुनिक तकनीक से रामकथा को पेश किया। ये सभी प्रस्तुतियां श्रीराम के आदर्शों को प्रासंगिक बनाए रखती हैं।