
आयुर्वेद की अनमोल धरोहर औषधीय गोंद प्रकृति के वरदान हैं, जो विभिन्न वृक्षों से प्राप्त रेजिन के रूप में उपलब्ध होते हैं। सदियों से इनका उपयोग विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के निवारण में किया जाता रहा है। ये गोंद शरीर की कमजोरी दूर करने से लेकर हड्डियों को मजबूत बनाने, पाचन सुधारने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तक हर क्षेत्र में सहायक हैं।
कतीरा गोंद गर्मीजनित थकान, मूत्र मार्ग की जलन और कब्ज के लिए उत्तम है। यह शरीर को ठंडक प्रदान करता है। बबूल गोंद हड्डियों की मजबूती बढ़ाता है, प्रसवोत्तर कमजोरी मिटाता है और कमर दर्द व जोड़ों की पीड़ा में राहत देता है।
गोंदनी गोंद मोटापा घटाने, कब्ज दूर करने और पाचन शक्ति मजबूत करने में कारगर है। धावडा गोंद शरीर को ताकतवर बनाता है, घाव जल्दी भरता है और ऊर्जा का संचार करता है।
सहजन गोंद हड्डी कमजोरी, रोग प्रतिरोधक क्षमता और थकान दूर करने में लाभदायक। आम गोंद पेट विकार, दस्त और दुर्बलता में सहायक। नीम गोंद त्वचा रोग, रक्त शुद्धि और फोड़े-फुंसी में रामबाण।
पीपल गोंद खांसी, दमा व गले की खराश में फायदेमंद। बरगद गोंद महिलाओं में प्रदर रोग, कमजोरी और रक्तस्राव नियंत्रण में उपयोगी। बेल गोंद दस्त, पेचिश, पेट की गर्मी कम करने व आंत मजबूत करने में श्रेष्ठ।
गुग्गुल गोंद गठिया, जोड़ दर्द, मोटापा व कोलेस्ट्रॉल घटाने में असरदार। लोबान गोंद मानसिक शांति, सिरदर्द, सूजन व दर्द निवारण में सहायक।
राल गोंद घाव भराई, त्वचा रोग व सूजन में लाभकारी। शल्लकी गोंद गठिया, जोड़ सूजन व मांसपेशी दर्द में प्रभावी। हींग गोंद गैस, अपच व पेट दर्द से मुक्ति दिलाता है।
अर्जुन गोंद हृदय रोग, उच्च रक्तचाप व हृदय कमजोरी में उपयोगी। अशोक गोंद स्त्री रोग, अनियमित माहवारी व अत्यधिक रक्तस्राव में फायदा।
साल गोंद घाव, सूजन व त्वचा समस्या हल करता है। खैर गोंद मुंह के छाले, दस्त व रक्त बहना रोकने में अच्छा। इमली गोंद पेट गर्मी, कब्ज व पाचन सुधार में सहायक।
इन गोंदों के अद्भुत गुण हैं, किंतु उपयोग से पूर्व किसी योग्य वैद्य की सलाह अनिवार्य है ताकि कोई हानि न हो।
