
नई दिल्ली, 17 जनवरी। दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में हाल ही में संपन्न नौसेना अभ्यास में भारत ने हिस्सा नहीं लिया। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ‘एक्सरसाइज विल फॉर पीस 2026’ पूरी तरह दक्षिण अफ्रीका की ओर से आयोजित था और यह कोई स्थायी ब्रिक्स गतिविधि नहीं थी।
मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शनिवार को कहा, ‘यह अभ्यास दक्षिण अफ्रीका की पहल था, जिसमें कुछ ब्रिक्स देश शामिल हुए। यह संस्थागत ब्रिक्स कार्यक्रम नहीं है और भारत ने कभी ऐसी एकतरफा गतिविधियों में भाग नहीं लिया।’
9 से 16 जनवरी तक चले इस अभ्यास में चीन का गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर तांगशान, सप्लाई जहाज ताइहू, रूस का कॉर्वेट स्टोइकी और दक्षिण अफ्रीका का फ्रिगेट अमाटोला शामिल थे। अभ्यास में समुद्री हमले, अपहरणग्रस्त जहाजों की मुक्ति, संयुक्त खोज-बचाव और फॉर्मेशन बदलाव जैसे ड्रिल हुए।
दक्षिण अफ्रीकी विदेश मंत्रालय ने इसे ब्रिक्स प्लस देशों के लिए मंच बताया, जिसका थीम है ‘समुद्री व्यापार और आर्थिक गतिविधियों की सुरक्षा के लिए संयुक्त कार्रवाई’। इससे अंतर-संचालनीयता बढ़ाने और शांतिपूर्ण समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने का लक्ष्य था।
भारत हालांकि आईबीएसएएमएआर अभ्यास का हिस्सा है, जिसमें भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाएं शामिल होती हैं। इसका पिछला संस्करण अक्टूबर 2024 में हुआ था।
यह घटना ब्रिक्स के भीतर समुद्री सहयोग की जटिलताओं को उजागर करती है। भारत की रणनीति स्पष्ट है—केवल औपचारिक मंचों पर ही भागीदारी। हिंद महासागर में बढ़ते भू-राजनीतिक दबाव के बीच यह फैसला महत्वपूर्ण है।
