
भारत का रोजगार बाजार 2023 के अंतिम महीने में मजबूत बना रहा, जब केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) के आंकड़ों के अनुसार बेरोजगारी दर 4.8 प्रतिशत पर स्थिर रही।
यह आंकड़ा पिछले तिमाहियों से मामूली सुधार दर्शाता है, जो महामारी के बाद आर्थिक पुनरुद्धार की दिशा में सकारात्मक संकेत देता है। शहरी क्षेत्रों में यह दर 5.2 प्रतिशत रही, जबकि ग्रामीण इलाकों में 4.5 प्रतिशत, जो क्षेत्रीय असमानताओं को उजागर करता है।
विशेषज्ञ सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्रों में भर्ती में वृद्धि को इसका श्रेय देते हैं। स्किल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी सरकारी योजनाओं ने कार्यबल को कुशल बनाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
फिर भी चुनौतियां बरकरार हैं। 15-29 आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी 12.4 प्रतिशत है, जो शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण में लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता बताता है।
2024 में आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि बुनियादी ढांचे निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार से यह दर और घटीगी। यह आंकड़ा परिपक्व श्रम बाजार को प्रतिबिंबित करता है, लेकिन पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के लिए निरंतर नीतिगत ध्यान जरूरी है।
