
नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर आर्थिक आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि महंगाई समायोजित जीडीपी के आंकड़े देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति को छिपाने का काम कर रहे हैं।
रमेश ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि रियल जीडीपी की गणना पद्धति में अपनाए गए महंगाई समायोजन से विकास की तस्वीर को जानबूझकर चमकदार बनाया जा रहा है। ‘ये आंकड़े न केवल भ्रामक हैं, बल्कि जनता को गुमराह करने की साजिश हैं,’ उन्होंने कहा।
उन्होंने खुदरा महंगाई और थोक मूल्य सूचकांक के बीच के अंतर को रेखांकित किया। खाद्य पदार्थों की कीमतें 8 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी हैं, लेकिन जीडीपी समायोजन इस दर्द को नजरअंदाज कर देता है। निजी खपत और निवेश के कमजोर आंकड़े इसका प्रमाण हैं।
रमेश ने नाममात्र जीडीपी (नॉमिनल जीडीपी) के प्रकाशन की मांग की, जो बिना समायोजन के सच्ची विकास दर दिखाएगी। ‘नॉमिनल आंकड़े बताएंगे कि वृद्धि ठहराव के कगार पर है, रोजगार संकट गहरा रहा है,’ उन्होंने चेताया।
यह आरोप ऐसे समय पर आए हैं जब सरकार तिमाही जीडीपी आंकड़े जारी करने वाली है। अर्थशास्त्रियों का एक वर्ग रमेश की बात से सहमत है कि रियल जीडीपी कभी-कभी मुद्रास्फीति के दबाव को छिपा देती है।
रमेश ने आरबीआई की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने स्वतंत्र आर्थिक ऑडिट की आवश्यकता बताई। ‘डेटा की अखंडता पर सरकार का नियंत्रण लोक اعتماد को कमजोर कर रहा है।’
चुनावी माहौल में यह विवाद राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। जीडीपी पद्धति पर बहस तेज होने के आसार हैं, जो नीतिगत फैसलों को प्रभावित करेगी।
