
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे के मराठी बनाम गैर-मराठी वाले बयान पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता माजिद मेमन ने कड़ा प्रहार किया है। मेमन ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि यह सोच देश की एकता के खिलाफ है।
मुंबई में आयोजित एक रैली में ठाकरे ने गैर-मराठी प्रवासियों पर स्थानीय नौकरियों और सांस्कृतिक स्थानों पर कब्जे का आरोप लगाया। उन्होंने ‘मिट्टी के सपूतों’ को प्राथमिकता देने की मांग की, जो मनसे की पुरानी क्षेत्रीयवादी राजनीति की याद दिलाती है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मेमन ने कहा, ‘मराठी बनाम गैर-मराठी वाली यह सोच न केवल पिछड़ी हुई है, बल्कि संविधान के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन करती है। अनुच्छेद 19 सभी को देश में कहीं भी रहने और घूमने की आजादी देता है।’ उन्होंने ठाकरे पर वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया।
मेमन ने आगे बताया कि मुंबई की चमक-दमक गैर-मराठी लोगों के योगदान से ही है। ‘गुजराती, मारवाड़ी, बिहारी और तमिल समुदाय ने इस शहर को वैश्विक पहचान दी है। आंकड़े बताते हैं कि प्रवासी श्रमिक महाराष्ट्र की जीडीपी में बड़ा योगदान देते हैं।’
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद महाराष्ट्र की शहरी राजनीति की जटिलताओं को उजागर करता है। मनसे, जो कभी मजबूत थी, अब चुनावी संघर्ष कर रही है। टीएमसी का यह हस्तक्षेप बंगाल से बाहर विस्तार की रणनीति का हिस्सा लगता है।
विपक्षी दल भी सक्रिय हो गए हैं। समाजसेवी संगठन संवाद की अपील कर रहे हैं। मेमन ने समापन में कहा, ‘भारत की ताकत विविधता में है, नफरत में नहीं।’ यह बहस राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।
