
1947 से लेकर आज तक भारत का आम बजट न केवल आर्थिक नीतियों का आईना रहा है, बल्कि प्रौद्योगिकी के बदलते स्वरूप का भी प्रतीक बन गया है। कागजी कार्रवाई से डिजिटल डैशबोर्ड तक का सफर बेहद रोचक है।
आजादी के ठीक बाद 26 नवंबर 1947 को पहला बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री आर.के. शानमुखम चेट्टी ने हस्तलिखित दस्तावेजों का सहारा लिया। संसद में सांसदों को मुद्रित प्रतियां मिलतीं, लेकिन प्रक्रिया धीमी और त्रुटिपूर्ण थी।
1970 के दशक में टाइपराइटर आए, 80 के दशक में कंप्यूटर। फिर भी वित्त मंत्री का चमड़े का सूटकेस बजट का प्रतीक बना रहा। 2017 में अरुण जेटली ने इस परंपरा तोड़ी और टैबलेट लेकर संसद पहुंचे। बजट भाषण पेपरलेस हो गया, दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध।
आज बजट एक डिजिटल उत्सव है। यूट्यूब लाइव स्ट्रीमिंग, मोबाइल ऐप, इंटरैक्टिव चार्ट्स ने आम आदमी तक जानकारी पहुंचाई। फरवरी में प्रस्तुति, रंगीन दस्तावेज, हिंदी-अंग्रेजी भाषण—ये सभी बदलाव महत्वपूर्ण हैं।
कोविड काल में वर्चुअल बजट ने नई ऊंचाइयां छुईं। चुनौतियां बाकी हैं जैसे साइबर सुरक्षा, लेकिन डिजिटल बजट पारदर्शिता का नया अध्याय लिख रहा है। विकसित भारत के सपने में ये यात्रा मील का पत्थर बनेगी।
